Sunday, 12 August 2012

एक रात

धियारे जीवननभ में
बिजुरी
चमक गयी तुम!
सावन झूला झूला जब
बा
हों में रमक गयीं तुम!
कजली बाहर गूजी जब
श्रुतिस्वर
सी गमक गयीं तुम!
महकी गंध त्रियामा जब
पायल
झमक गयीं तुम !
तुलसी चौरे पर आकर
अलबेली छमक गयीं तुम!
सूने घर आगन में आ
दीपक
सी दमक गयीं तुम!

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